भारत में आज आधार कार्ड (Aadhaar Card) सबसे महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेज़ों (Identity Documents) में से एक बन चुका है। यह 12 अंकों का यूनिक नंबर है, जिसका उपयोग सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, मोबाइल सिम और कई डिजिटल सेवाओं में किया जाता है। आधार की शुरुआत भारत के प्रसिद्ध तकनीकी विशेषज्ञ Nandan Nilekani की सोच और नेतृत्व में हुई थी।
साल 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने नंदन नीलेकणी को UIDAI (Unique Identification Authority of India) का नेतृत्व सौंपा। इस परियोजना का उद्देश्य देश के हर नागरिक को एक ऐसी यूनिक पहचान देना था, जिसे कहीं भी डिजिटल रूप से सत्यापित किया जा सके। आधार प्रणाली ने सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी (Transparent) और आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नंदन नीलेकणी कौन हैं?
नंदन नीलेकणी भारत के जाने-माने सॉफ्टवेयर इंजीनियर और उद्योगपति हैं। उनका जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने IIT बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
वर्ष 1981 में उन्होंने एन.आर. नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ मिलकर इन्फोसिस (Infosys) की स्थापना की। बाद में वे कंपनी के CEO बने और इन्फोसिस को दुनिया की प्रमुख IT कंपनियों में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई।
आधार परियोजना के लिए उन्होंने इन्फोसिस की नौकरी छोड़ दी और देश की डिजिटल पहचान प्रणाली को मजबूत बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी कारण उन्हें अक्सर “भारत का आधार मैन” कहा जाता है।